You are currently viewing “राम” जप ही राज योग क्यों है?

“राम” जप ही राज योग क्यों है?

आइये, सर्वप्रथम शुरुआत करते हैं “योग” से योग का अर्थ होता है जोड़ना शारीरिक योग के 1 द्वारा हम इस शरीर को प्रकृति से जोड़ कर स्वस्थ बनाते हैं एवं अत्यधिक योग के द्वारा जीवात्मा को परमात्मा से जोड़कर आवागमन से मुक्त कराते हैं।

अतः राजयोग क्या है?- राजयोग है सभी योगों में सर्वोत्तम जिसको करने से शरीर एवं आत्मा दोनों के विकार नष्ट हो जाते हैं। शारीरिक रोग आप समझते हैं परन्तु जीवात्मा का रोग क्या है- जीवात्मा को रोग लगा है जन्म जन्मांतर से शरीर धारण करने एवं छोड़ने का ।

इस संसार में सबसे उत्तम योग है अष्टांग योग। किन्तु यह आपको शारीरिक विकारों से मुक्ति दिला सकता है न की आत्मिक विकार से आत्मिक विकार को मिटाने हेतु केवल “नाम” की कि आवश्यकता है, एक ऐसा “नाम” जिसका विधिपूर्वक जाप करने से आत्मा परमात्मा से मिलने की के अंतर्विज्ञान यात्रा पर अग्रसर हो जाती है तथा निरंतर एवं सतत जप से व सद्गुरु कृपा से अंततः में परमात्मा में मिल जाती है।

एक ऐसा नाम जो सत्य स्वरुप में परमात्मा की संज्ञा है। जिसे अनंताई युगों से केवली भगवतों ने शोध कर सिद्ध किया है कि एहि एक “नाम” है जो परमात्मा से आत्मा का पुनर्मिलन करा सकता है।

और वह नाम है- “राम” नाम (केवल नाम) ॥

रागु धनासरी वाणी भगत कबीर जी की 

सतिगुर प्रसादि ॥ राम सिमरि राम सिमर राम

सिमरि भाई राम नाम सिमरन दिन बुडले

अधिकाई ॥ 1 ॥ रहाउ || वनिता सुत देह ग्रेह सम्पति

सुखदाई ॥ इन्ह में कछु नाहि तेरी काल अवध आई

॥1 ॥ अजामल गज गनिका पतित करम कीने

तेउ उतरि पारि परे राम नाम लीने ॥2॥ सुकर

कुकर जोनि भ्रमे तउ लाज न आई ॥ राम नाम

छाड़ि अमित काहे विखु खाई ॥3॥ तजि भरम

करम विधि निखेध राम नहु तेही || गुर प्रसादि

जान कबीर रामु करि सनेही ॥4॥

Leave a Reply